बालकाण्ड · दोहा 69 · दोहा/सोरठा
जौं अस हिसिषा करहिं नर जड़ि बिबेक अभिमान।
मूल पाठ
जौं अस हिसिषा करहिं नर जड़ि बिबेक अभिमान।
परहिं कलप भरि नरक महुँ जीव कि ईस समान।।69।।
स्रोत अभिलेख 1.69 · पुस्तक पृ. 87, 87
भावार्थ
मूल पाठ के बादयदि मूर्ख मनुष्य ज्ञानके अभिमानसे इस प्रकार होड़ करते हैं तो वे कल्पभरके लिये नरकमें पड़ते हैं। भला, कहीं जीव भी ईश्वरके समान (सर्वथा स्वतन्त्र) हो सकता है?॥ ६९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 87 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1जौं अस हिसिषा करहिं नर जड़ि बिबेक अभिमान।
English explanation
If people act thus out of pride—the readings ‘हिसिषा’ and ‘जड़ि’ are unclear; the context appears to warn against such imitation without discernment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| अस | ऐसा; इस प्रकार | thus; such |
| हिसिषा | होड़ में अनुकरण; ईश्वर की बराबरी करने का प्रयास। | Rivalrous imitation; attempting to match God. |
| करहिं | करते हैं; करें | do; should do |
| नर | मनुष्य | people |
| जड़ि | मूर्ख; विवेकहीन। | Foolish; lacking discernment. |
| बिबेक | विवेक; उचित-अनुचित की समझ | discernment of right and wrong |
| अभिमान | अभिमान; अहंकार | pride; conceit |
2 परहिं कलप भरि नरक महुँ जीव कि ईस समान।।69।।
English explanation
They fall into hell for an entire cosmic age. Is an individual soul equal to God?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परहिं | पड़ते हैं | fall |
| कलप | कल्प; बहुत लंबा ब्रह्मांडीय काल | a kalpa; a cosmic age |
| भरि | भर; पूरे समय तक | throughout; for the whole |
| नरक | नरक | hell |
| महुँ | में | in; into |
| जीव | जीव; व्यक्तिगत प्राणी या आत्मा | an individual being or soul |
| कि | क्या | is …? |
| ईस | ईश्वर | God; the Lord |
| समान | समान; बराबर | equal to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 69
- स्रोत अभिलेख
- 1.69
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 87
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 87, 87
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।