बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुभ अरु असुभ सलिल सब बहई। सुरसरि कोउ अपुनीत न कहई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दगङ्गाजीमें शुभ और अशुभ सभी जल बहता है, पर कोई उन्हें अपवित्र नहीं कहता। सूर्य, अग्रि और गङ्गाजीकी भाँति समर्थको कुछ दोष नहीं लगता॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 87 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुभ अरु असुभ सलिल सब बहई। सुरसरि कोउ अपुनीत न कहई।।
समरथ कहुँ नहिं दोषु गोसाई। रबि पावक सुरसरि की नाई।।
स्रोत अभिलेख 1.69 · पुस्तक पृ. 87, 87
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुभ अरु असुभ सलिल सब बहई। सुरसरि कोउ अपुनीत न कहई।।
English explanation
Waters both pure and impure flow in the Ganges, yet no one calls her impure.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुभ | शुभ; शुद्ध | pure; auspicious |
| अरु | और | and |
| असुभ | अशुभ; अशुद्ध | impure; inauspicious |
| सलिल | जल | water |
| सब | सब | all |
| बहई | बहता है | flows |
| सुरसरि | गंगा; देवताओं की नदी | the Ganges, river of the gods |
| कोउ | कोई | anyone |
| अपुनीत | अपवित्र | impure |
| न | नहीं | not |
| कहई | कहता है | calls |
2 समरथ कहुँ नहिं दोषु गोसाई। रबि पावक सुरसरि की नाई।।
English explanation
O lord, no fault attaches to the mighty, as with the sun, fire, and the Ganges.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समरथ | समर्थ; सामर्थ्यवान | the mighty; capable |
| कहुँ | को | to |
| नहिं | नहीं | no |
| दोषु | दोष | fault |
| गोसाई | हे स्वामी | O lord |
| रबि | सूर्य | the sun |
| पावक | अग्नि | fire |
| सुरसरि | गंगा | the Ganges |
| की | के | of |
| नाई | समान; तरह | like; in the manner of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.69
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 87
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 87, 87
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