बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं अहि सेज सयन हरि करहीं। बुध कछु तिन्ह कर दोषु न धरहीं।।
मूल पाठ
जौं अहि सेज सयन हरि करहीं। बुध कछु तिन्ह कर दोषु न धरहीं।।
भानु कृसानु सर्ब रस खाहीं। तिन्ह कहँ मंद कहत कोउ नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.69 · पुस्तक पृ. 87, 87
भावार्थ
मूल पाठ के बादजैसे विष्णुभगवान् शेषनागकी शय्यापर सोते हैं, तो भी पण्डित लोग उनको कोई दोष नहीं लगाते। सूर्य और अग्रिदेव अच्छे-बुरे सभी रसोंका भक्षण करते हैं, परन्तु उनको कोई बुरा नहीं कहता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 87 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जौं अहि सेज सयन हरि करहीं। बुध कछु तिन्ह कर दोषु न धरहीं।।
English explanation
Though Hari sleeps on a serpent couch, the wise attribute no fault to him for it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि; यद्यपि | if; though |
| अहि | सर्प | serpent |
| सेज | शय्या | couch; bed |
| सयन | शयन | sleeping; resting |
| हरि | हरि; विष्णु | Hari, Vishnu |
| करहीं | करते हैं | do |
| बुध | बुद्धिमान लोग | the wise |
| कछु | कुछ भी; कोई | any |
| तिन्ह | उनका | his |
| कर | का | of |
| दोषु | दोष | fault |
| न | नहीं | not |
| धरहीं | लगाते; मानते | attribute; impute |
2 भानु कृसानु सर्ब रस खाहीं। तिन्ह कहँ मंद कहत कोउ नाहीं।।
English explanation
The sun and fire consume all kinds of substances, yet no one calls them bad.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भानु | सूर्य | the sun |
| कृसानु | अग्नि | fire |
| सर्ब | सभी | all |
| रस | रस; पदार्थों के सार | juices; essences of substances |
| खाहीं | खाते; ग्रहण करते हैं | consume; absorb |
| तिन्ह | उनको | them |
| कहँ | को | to |
| मंद | बुरा; दूषित | bad; tainted |
| कहत | कहता | calls |
| कोउ | कोई | anyone |
| नाहीं | नहीं | not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.69
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 87
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 87, 87
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