बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुरसरि जल कृत बारुनि जाना। कबहुँ न संत करहिं तेहि पाना।।
मूल पाठ
सुरसरि जल कृत बारुनि जाना। कबहुँ न संत करहिं तेहि पाना।।
सुरसरि मिलें सो पावन जैसें। ईस अनीसहि अंतरु तैसें।।
स्रोत अभिलेख 1.7 · पुस्तक पृ. 87, 88
भावार्थ
मूल पाठ के बादगङ्गाजलसे भी बनायी हुई मदिराको जानकर संत लोग कभी उसका पान नहीं करते। पर वही गङ्गाजीमें मिल जानेपर जैसे पवित्र हो जाती है, ईश्वर और जीवमें भी वैसा ही भेद है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 87 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुरसरि जल कृत बारुनि जाना। कबहुँ न संत करहिं तेहि पाना।।
English explanation
Knowing liquor to have been made from Ganges water, saints still never drink it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुरसरि | गंगा नदी का | of the Ganges River |
| जल | जल | water |
| कृत | से बनाई गई | made from |
| बारुनि | मदिरा | liquor |
| जाना | जानकर | knowing it to be |
| कबहुँ | कभी | ever |
| न | नहीं | not |
| संत | संतजन | saints |
| करहिं | करते हैं | perform |
| तेहि | उसका | of it |
| पाना | पान; पीना | drinking |
2 सुरसरि मिलें सो पावन जैसें। ईस अनीसहि अंतरु तैसें।।
English explanation
Yet that same liquor becomes pure upon merging into the Ganges; such is the distinction between the Lord and the limited individual being.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुरसरि | गंगा में | into the Ganges |
| मिलें | मिल जाने पर | upon merging |
| सो | वही मदिरा | that same liquor |
| पावन | पवित्र | pure |
| जैसें | जिस प्रकार | just as |
| ईस | ईश्वर; समर्थ प्रभु | the Lord, sovereign in power |
| अनीसहि | सामर्थ्यहीन जीव के बीच | and the non-sovereign individual being |
| अंतरु | भेद | distinction |
| तैसें | उसी प्रकार | so too |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 87
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 87, 88
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।