बालकाण्ड · दोहा 132 · दोहा/सोरठा
जेहि बिधि होइहि परम हित नारद सुनहु तुम्हार।
जेहि बिधि होइहि परम हित नारद सुनहु तुम्हार।
सोइ हम करब न आन कछु बचन न मृषा हमार।।132।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.132 · पुस्तक पृ. 142, 142
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1जेहि बिधि होइहि परम हित नारद सुनहु तुम्हार।
हे नारद, सुनो: जिस प्रकार तुम्हारा परम हित होगा—
English explanation
Listen, Narada: whatever will bring about your highest welfare—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिस | whichever |
| बिधि | प्रकार से | in the manner |
| होइहि | होगा | will come about |
| परम | सर्वोच्च | highest |
| हित | हित | welfare |
| नारद | हे नारद मुनि | O sage Narada |
| सुनहु | सुनो | listen |
| तुम्हार | तुम्हारा | your |
2 सोइ हम करब न आन कछु बचन न मृषा हमार।।132।।
मैं वही करूँगा, और कुछ नहीं; मेरा वचन असत्य नहीं होता।
English explanation
I shall do precisely that, and nothing else; my word is not false.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | precisely that |
| हम | मैं | I |
| करब | करूँगा | shall do |
| न | नहीं | not |
| आन | अन्य | other |
| कछु | कुछ | anything |
| बचन | वचन | word |
| न | नहीं | not |
| मृषा | असत्य | false |
| हमार | मेरा | my |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 132
- स्रोत अभिलेख
- 1.132
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 142, 142
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।