बालकाण्ड · दोहा 131 · दोहा/सोरठा
एहि अवसर चाहिअ परम सोभा रूप बिसाल।
एहि अवसर चाहिअ परम सोभा रूप बिसाल।
जो बिलोकि रीझै कुअँरि तब मेलै जयमाल।।131।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.131 · पुस्तक पृ. 141, 142
भावार्थ और शब्दार्थ
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1एहि अवसर चाहिअ परम सोभा रूप बिसाल।
इस अवसर पर परम शोभा और अत्यंत सुंदर रूप चाहिए।
English explanation
On this occasion, supreme beauty and a magnificent appearance are needed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| अवसर | अवसर पर | on the occasion |
| चाहिअ | चाहिए | is needed |
| परम | अत्युत्तम | supreme |
| सोभा | शोभा | beauty |
| रूप | रूप | appearance |
| बिसाल | अत्यंत भव्य | magnificent |
2 जो बिलोकि रीझै कुअँरि तब मेलै जयमाल।।131।।
जिसे देखकर राजकुमारी रीझ जाए और तब मुझे जयमाला पहनाए।
English explanation
Seeing that appearance, the princess should be captivated and then place the bridal garland on me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जिसे | which |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| रीझै | रीझ जाए | becomes captivated |
| कुअँरि | राजकुमारी | the princess |
| तब | तब | then |
| मेलै | पहनाए | places on me |
| जयमाल | वर-चयन की माला | the garland marking her choice of husband |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 131
- स्रोत अभिलेख
- 1.131
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 141, 142
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