बालकाण्ड · दोहा 130 · दोहा/सोरठा
आनि देखाई नारदहि भूपति राजकुमारि।
आनि देखाई नारदहि भूपति राजकुमारि।
कहहु नाथ गुन दोष सब एहि के हृदयँ बिचारि।।130।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.13 · पुस्तक पृ. 140, 141
भावार्थ और शब्दार्थ
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1आनि देखाई नारदहि भूपति राजकुमारि।
राजा ने राजकुमारी को लाकर नारद को दिखाया।
English explanation
The king brought the princess and presented her to Narada.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आनि | लाकर | having brought |
| देखाई | दिखाया | presented |
| नारदहि | नारद मुनि को | to the sage Narada |
| भूपति | राजा ने | the king |
| राजकुमारि | राजकुमारी को | the princess |
2 कहहु नाथ गुन दोष सब एहि के हृदयँ बिचारि।।130।।
हे नाथ, अपने हृदय में विचार करके इसके सभी गुण और दोष बताइए।
English explanation
Revered master, reflect within your heart and tell me all her virtues and faults.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहु | बताइए | please tell |
| नाथ | हे स्वामी | revered master |
| गुन | गुण | virtues |
| दोष | दोष | faults |
| सब | सभी | all |
| एहि | इस राजकुमारी | this princess |
| के | के | of |
| हृदयँ | अपने हृदय में | within your heart |
| बिचारि | विचार करके | having reflected |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 130
- स्रोत अभिलेख
- 1.13
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 140, 141
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