बालकाण्ड · दोहा 129 · दोहा/सोरठा
बिरचेउ मग महुँ नगर तेहिं सत जोजन बिस्तार।
बिरचेउ मग महुँ नगर तेहिं सत जोजन बिस्तार।
श्रीनिवासपुर तें अधिक रचना बिबिध प्रकार।।129।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.129 · पुस्तक पृ. 139, 140
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बिरचेउ मग महुँ नगर तेहिं सत जोजन बिस्तार।
उस माया ने मार्ग में सौ योजन विस्तार वाला नगर रचा।
English explanation
That Maya created along the road a city extending a hundred yojanas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिरचेउ | रचा | created |
| मग | मार्ग | the road |
| महुँ | में | on |
| नगर | नगर | a city |
| तेहिं | उस माया ने | that Maya |
| सत | सौ | one hundred |
| जोजन | योजन, दूरी की प्राचीन इकाई | yojanas, an ancient distance unit |
| बिस्तार | विस्तार | extent |
2 श्रीनिवासपुर तें अधिक रचना बिबिध प्रकार।।129।।
उस नगर की विविध प्रकार की रचना श्रीनिवास के नगर वैकुंठ से भी बढ़कर थी।
English explanation
The city’s varied design surpassed even Vaikuntha, the city of Vishnu.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रीनिवासपुर | श्रीनिवास का नगर, वैकुंठ | Vaikuntha, the city of Vishnu |
| तें | से | than |
| अधिक | बढ़कर | surpassing |
| रचना | रचना, बनावट | design |
| बिबिध | विविध | various |
| प्रकार | प्रकार की | of kinds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 129
- स्रोत अभिलेख
- 1.129
- सहायक विषय
- नारदका अभिमान और मायाका प्रभाव
- मुद्रित पृष्ठ
- 139, 140
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