बालकाण्ड · दोहा 128 · दोहा/सोरठा
रूख बदन करि बचन मृदु बोले श्रीभगवान ।
रूख बदन करि बचन मृदु बोले श्रीभगवान ।
तुम्हरे सुमिरन तें मिटहिं मोह मार मद मान।।128।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.128 · पुस्तक पृ. 139, 139
भावार्थ और शब्दार्थ
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1रूख बदन करि बचन मृदु बोले श्रीभगवान ।
मुख को रूखा बनाकर भगवान विष्णु मधुर वचन बोले।
English explanation
With a stern expression on his face, Lord Vishnu spoke gentle words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रूख | रूखा; गंभीर | stern; unsmiling |
| बदन | मुख | face |
| करि | करके | making |
| बचन | वचन | words |
| मृदु | कोमल; मधुर | gentle; soft |
| बोले | बोले | spoke |
| श्रीभगवान | भगवान विष्णु | Lord Vishnu |
2 तुम्हरे सुमिरन तें मिटहिं मोह मार मद मान।।128।।
‘आपके स्मरण से मोह, काम, मद और अहंकार मिट जाते हैं।’
English explanation
‘Through remembrance of you, delusion, desire, conceit, and pride disappear.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्हरे | आपके | of you |
| सुमिरन | स्मरण | remembrance |
| तें | से | through |
| मिटहिं | मिट जाते हैं | disappear |
| मोह | मोह | delusion |
| मार | काम; कामदेव | desire; the god of desire |
| मद | मद; घमंड | conceit |
| मान | अहंकार | pride |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 128
- स्रोत अभिलेख
- 1.128
- सहायक विषय
- नारदका अभिमान और मायाका प्रभाव
- मुद्रित पृष्ठ
- 139, 139
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