बालकाण्ड · दोहा 133 · दोहा/सोरठा
रहे तहाँ दुइ रुद्र गन ते जानहिं सब भेउ।
रहे तहाँ दुइ रुद्र गन ते जानहिं सब भेउ।
बिप्रबेष देखत फिरहिं परम कौतुकी तेउ।।133।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.133 · पुस्तक पृ. 143, 143
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1रहे तहाँ दुइ रुद्र गन ते जानहिं सब भेउ।
वहाँ शिव के दो गण उपस्थित थे; वे सारा रहस्य जानते थे।
English explanation
Two attendants of Shiva were present there; they knew the entire secret.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रहे | उपस्थित थे | were present |
| तहाँ | वहाँ | there |
| दुइ | दो | two |
| रुद्र | शिव के | of Shiva |
| गन | गण; अनुचर | attendants |
| ते | वे | they |
| जानहिं | जानते थे | knew |
| सब | पूरा | the entire |
| भेउ | भेद; रहस्य | secret |
2 बिप्रबेष देखत फिरहिं परम कौतुकी तेउ।।133।।
वे दोनों बड़े कौतुकप्रिय थे और ब्राह्मण-वेश में देखते हुए घूम रहे थे।
English explanation
Both were greatly fond of amusement and wandered about in Brahmin guise, watching.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्रबेष | ब्राह्मण के वेश में | in Brahmin guise |
| देखत | देखते हुए | watching |
| फिरहिं | घूम रहे थे | were wandering about |
| परम | अत्यंत | very |
| कौतुकी | कौतुक और विनोद के प्रेमी | fond of amusement |
| तेउ | वे दोनों | those two |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 133
- स्रोत अभिलेख
- 1.133
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 143, 143
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