बालकाण्ड · दोहा 134 · दोहा/सोरठा
सखीं संग लै कुअँरि तब चलि जनु राजमराल।
सखीं संग लै कुअँरि तब चलि जनु राजमराल।
देखत फिरइ महीप सब कर सरोज जयमाल।।134।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.134 · पुस्तक पृ. 143, 144
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सखीं संग लै कुअँरि तब चलि जनु राजमराल।
तब राजकुमारी सखियों को साथ लेकर ऐसे चली, मानो राजहंस हो।
English explanation
Then the princess proceeded with her companions, like a royal swan.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सखीं | सखियों को | her female companions |
| संग | साथ | along |
| लै | लेकर | taking |
| कुअँरि | राजकुमारी | the princess |
| तब | तब | then |
| चलि | चली | proceeded |
| जनु | मानो | as though |
| राजमराल | राजहंस | a royal swan |
2 देखत फिरइ महीप सब कर सरोज जयमाल।।134।।
वह सभी राजाओं को देखती हुई घूम रही थी; उसके कमल-समान हाथ में जयमाला थी।
English explanation
She moved around looking at all the kings, holding the marriage garland in her lotus-like hand.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखत | देखती हुई | looking at |
| फिरइ | घूमती है | moves around |
| महीप | राजाओं को | the kings |
| सब | सभी | all |
| कर | हाथ में | in her hand |
| सरोज | कमल-समान | lotus-like |
| जयमाल | वर चुनने की माला; जयमाला | garland for choosing her husband |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 134
- स्रोत अभिलेख
- 1.134
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 143, 144
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