बालकाण्ड · दोहा 118 · दोहा/सोरठा
जेहि इमि गावहि बेद बुध जाहि धरहिं मुनि ध्यान।।
जेहि इमि गावहि बेद बुध जाहि धरहिं मुनि ध्यान।।
सोइ दसरथ सुत भगत हित कोसलपति भगवान।।118।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.118 · पुस्तक पृ. 130, 130
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जेहि इमि गावहि बेद बुध जाहि धरहिं मुनि ध्यान।।
जिनका वेद और विद्वान इस प्रकार गुणगान करते हैं, और जिनका मुनि ध्यान करते हैं—
English explanation
The one whom the Vedas and the wise praise thus, and upon whom sages meditate—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिनका | whom |
| इमि | इस प्रकार | thus |
| गावहि | गुणगान करते हैं | praise |
| बेद | वेद | the Vedas |
| बुध | विद्वान; ज्ञानी | the wise |
| जाहि | जिनका | upon whom |
| धरहिं | करते हैं; धारण करते हैं | hold; engage in |
| मुनि | मुनि; ऋषि | sages |
| ध्यान | ध्यान | meditation |
2 सोइ दसरथ सुत भगत हित कोसलपति भगवान।।118।।
वही भगवान भक्तों के हित के लिए दशरथ के पुत्र, कोसल के स्वामी राम हैं।
English explanation
That very Lord is Rama, son of Dasharatha and ruler of Kosala, for the welfare of his devotees.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that very one |
| दसरथ | राजा दशरथ के | of King Dasharatha |
| सुत | पुत्र | son |
| भगत | भक्तों के | of devotees |
| हित | हित के लिए | for the welfare |
| कोसलपति | कोसल के स्वामी राम | Rama, ruler of Kosala |
| भगवान | भगवान; परमेश्वर | the Lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 118
- स्रोत अभिलेख
- 1.118
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 130, 130
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