बालकाण्ड · दोहा 246 · दोहा/सोरठा
जानि सुअवसरु सीय तब पठई जनक बोलाई।
जानि सुअवसरु सीय तब पठई जनक बोलाई।
चतुर सखीं सुंदर सकल सादर चलीं लवाईं।।246।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.246 · पुस्तक पृ. 239, 240
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1जानि सुअवसरु सीय तब पठई जनक बोलाई।
तब उपयुक्त अवसर जानकर जनक ने सीता को बुलाने के लिए संदेश भेजा।
English explanation
Then, recognizing the right moment, Janaka sent word to summon Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानि | जानकर | recognizing; knowing |
| सुअवसरु | शुभ और उपयुक्त अवसर | auspicious, fitting occasion |
| सीय | सीता को | Sita |
| तब | तब | then |
| पठई | बुलावा भेजा | sent a summons |
| जनक | राजा जनक; सीता के पिता | King Janaka, Sita’s father |
| बोलाई | बुलाने के लिए; बुलवाकर | to summon; having called for |
2 चतुर सखीं सुंदर सकल सादर चलीं लवाईं।।246।।
सभी चतुर और सुंदर सखियाँ सीता को आदरपूर्वक साथ लेकर चलीं।
English explanation
All the clever and beautiful companions set out, respectfully escorting Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चतुर | चतुर; समझदार | clever; discerning |
| सखीं | सखियाँ; सीता की सहेलियाँ | Sita’s female companions |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| सकल | सभी | all |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| चलीं | चलीं; प्रस्थान किया | set out; proceeded |
| लवाईं | सीता को साथ लिए हुए | escorting Sita; taking her along |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 246
- स्रोत अभिलेख
- 1.246
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 239, 240
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