बालकाण्ड · दोहा 247 · दोहा/सोरठा
एहि बिधि उपजै लच्छि जब सुंदरता सुख मूल।
एहि बिधि उपजै लच्छि जब सुंदरता सुख मूल।
तदपि सकोच समेत कबि कहहिं सीय समतूल।।247।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.247 · पुस्तक पृ. 240, 241
भावार्थ और शब्दार्थ
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1एहि बिधि उपजै लच्छि जब सुंदरता सुख मूल।
जब इस प्रकार सुंदरता और सुख की मूल लक्ष्मी उत्पन्न हों—
English explanation
When a Lakshmi who is the source of beauty and joy arose in this way—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार से | in the manner |
| उपजै | उत्पन्न हों | arose; came into being |
| लच्छि | लक्ष्मी | Lakshmi |
| जब | जब | when |
| सुंदरता | सुंदरता की | of beauty |
| सुख | सुख की | of joy |
| मूल | मूल; स्रोत | source |
2 तदपि सकोच समेत कबि कहहिं सीय समतूल।।247।।
तब भी कवि संकोच के साथ ही उन्हें सीता के बराबर कहेंगे।
English explanation
Even then, poets would only hesitantly call her equal to Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तदपि | तब भी | even then |
| सकोच | संकोच | hesitation |
| समेत | सहित; के साथ | with |
| कबि | कवि | poets |
| कहहिं | कहें; कहेंगे | would say; would call |
| सीय | सीता के | to Sita |
| समतूल | बराबर | equal |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 247
- स्रोत अभिलेख
- 1.247
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 240, 241
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