बालकाण्ड · दोहा 245 · दोहा/सोरठा
सीय बिआहबि राम गरब दूरि करि नृपन्ह के।।
सीय बिआहबि राम गरब दूरि करि नृपन्ह के।।
जीति को सक संग्राम दसरथ के रन बाँकुरे।।245।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.245 · पुस्तक पृ. 238, 239
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सीय बिआहबि राम गरब दूरि करि नृपन्ह के।।
राजाओं का अभिमान दूर करके सीता राम से विवाह करेंगी।
English explanation
Sita will marry Rama, dispelling the kings’ pride.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता | Sita |
| बिआहबि | विवाह करेंगी | will marry |
| राम | राम से | Rama |
| गरब | अभिमान | pride |
| दूरि | दूर | away |
| करि | करके | having made |
| नृपन्ह | राजाओं | the kings |
| के | का | of |
2 जीति को सक संग्राम दसरथ के रन बाँकुरे।।245।।
दशरथ के रणवीर पुत्रों को युद्ध में कौन जीत सकता है?
English explanation
Who can defeat Dasharatha’s valiant sons in battle?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जीति | जीत; पराजित कर | defeat |
| को | कौन | who |
| सक | सकता है | can |
| संग्राम | युद्ध में | in battle |
| दसरथ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| के | के | of |
| रन | युद्ध के | in battle |
| बाँकुरे | वीर पुत्रों को | the valiant sons |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 245
- स्रोत अभिलेख
- 1.245
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 238, 239
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