बालकाण्ड · दोहा 244 · दोहा/सोरठा
सब मंचन्ह ते मंचु एक सुंदर बिसद बिसाल।
सब मंचन्ह ते मंचु एक सुंदर बिसद बिसाल।
मुनि समेत दोउ बंधु तहँ बैठारे महिपाल।।244।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.244 · पुस्तक पृ. 237, 238
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सब मंचन्ह ते मंचु एक सुंदर बिसद बिसाल।
सब मंचों से बढ़कर एक मंच सुंदर, स्वच्छ और विशाल था।
English explanation
One platform surpassed all the others in beauty, cleanliness, and spaciousness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| मंचन्ह | मंचों | platforms |
| ते | से बढ़कर | surpassing |
| मंचु | मंच | platform |
| एक | एक | one |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| बिसद | स्वच्छ; उज्ज्वल | clean; bright |
| बिसाल | विशाल | spacious |
2 मुनि समेत दोउ बंधु तहँ बैठारे महिपाल।।244।।
राजा ने वहाँ मुनि सहित दोनों भाइयों को बैठाया।
English explanation
The king seated both brothers there together with the sage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि विश्वामित्र | the sage Vishvamitra |
| समेत | सहित | together with |
| दोउ | दोनों | both |
| बंधु | भाई—राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
| तहँ | वहाँ | there |
| बैठारे | बैठाया | seated |
| महिपाल | राजा जनक ने | King Janaka |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 244
- स्रोत अभिलेख
- 1.244
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 237, 238
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।