बालकाण्ड · दोहा 243 · दोहा/सोरठा
कुंजर मनि कंठा कलित उरन्हि तुलसिका माल।
कुंजर मनि कंठा कलित उरन्हि तुलसिका माल।
बृषभ कंध केहरि ठवनि बल निधि बाहु बिसाल।।243।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.243 · पुस्तक पृ. 236, 237
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कुंजर मनि कंठा कलित उरन्हि तुलसिका माल।
उनके वक्षों पर गजमणियों के कंठहार और तुलसी की मालाएँ सुशोभित हैं।
English explanation
Necklaces of elephant pearls and garlands of tulsi adorn their chests.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुंजर | हाथी से प्राप्त मानी जाने वाली | believed to come from elephants |
| मनि | मणियों के | of pearls |
| कंठा | कंठहार | necklaces |
| कलित | सुशोभित | adorning |
| उरन्हि | वक्षों पर | on their chests |
| तुलसिका | तुलसी की | of holy basil |
| माल | मालाएँ | garlands |
2 बृषभ कंध केहरि ठवनि बल निधि बाहु बिसाल।।243।।
उनके कंधे बैल के समान पुष्ट हैं, उनकी ठवन सिंह जैसी है, और विशाल भुजाएँ बल के भंडार हैं।
English explanation
Their shoulders are sturdy like a bull’s, their bearing is lion-like, and their mighty arms are repositories of strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बृषभ | बैल-समान | bull-like |
| कंध | कंधे | shoulders |
| केहरि | सिंह-समान | lion-like |
| ठवनि | ठवन; शारीरिक मुद्रा | bearing; stance |
| बल | शक्ति के | of strength |
| निधि | भंडार | repositories |
| बाहु | भुजाएँ | arms |
| बिसाल | विशाल | mighty; large |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 243
- स्रोत अभिलेख
- 1.243
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 236, 237
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