बालकाण्ड · दोहा 242 · दोहा/सोरठा
राजत राज समाज महुँ कोसलराज किसोर।
राजत राज समाज महुँ कोसलराज किसोर।
सुंदर स्यामल गौर तन बिस्व बिलोचन चोर।।242।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.242 · पुस्तक पृ. 235, 236
भावार्थ और शब्दार्थ
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1राजत राज समाज महुँ कोसलराज किसोर।
राजाओं की सभा में कोसलराज के किशोर पुत्र राम और लक्ष्मण सुशोभित हैं।
English explanation
The youthful sons of the king of Kosala, Rama and Lakshmana, shine in the assembly of kings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राजत | सुशोभित हैं | shine splendidly |
| राज | राजाओं की | of kings |
| समाज | सभा | assembly |
| महुँ | में | in |
| कोसलराज | कोसल के राजा दशरथ के | of Dasharatha, king of Kosala |
| किसोर | किशोर पुत्र | youthful sons |
2 सुंदर स्यामल गौर तन बिस्व बिलोचन चोर।।242।।
उनके सुंदर शरीर क्रमशः श्याम और गौर हैं; वे सारे संसार की दृष्टि को चुरा लेते हैं।
English explanation
Their beautiful bodies are dark and fair respectively; they captivate the eyes of the whole world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| स्यामल | श्याम वर्ण के | dark-complexioned |
| गौर | गौर वर्ण के | fair-complexioned |
| तन | शरीर | bodies |
| बिस्व | संसार के | of the world |
| बिलोचन | नेत्रों को | the eyes |
| चोर | चुराने वाले, दृष्टि मोह लेने वाले | stealers, captivating all eyes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 242
- स्रोत अभिलेख
- 1.242
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 235, 236
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