बालकाण्ड · दोहा 57 (ख) · दोहा/सोरठा
जलु पय सरिस बिकाइ देखहु प्रीति कि रीति भलि।
जलु पय सरिस बिकाइ देखहु प्रीति कि रीति भलि।
बिलग होइ रसु जाइ कपट खटाई परत पुनि।।57ख।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.57 · पुस्तक पृ. 77, 78
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 जलु पय सरिस बिकाइ देखहु प्रीति कि रीति भलि।
प्रेम की सुंदर रीति देखो: दूध में मिला पानी भी दूध के समान मूल्य पर बिकता है।
English explanation
See the lovely way of love: water mixed with milk sells at the same price as milk.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जलु | पानी | water |
| पय | दूध के | milk |
| सरिस | समान मूल्य पर | at the same price as |
| बिकाइ | बिकता है | sells |
| देखहु | देखो | see |
| प्रीति | प्रेम | love |
| कि | की | of |
| रीति | रीति | way |
| भलि | सुंदर | lovely |
2 बिलग होइ रसु जाइ कपट खटाई परत पुनि।।57ख।।
पर फिर कपट रूपी खटाई पड़ते ही दूध और पानी अलग हो जाते हैं और स्वाद मिट जाता है।
English explanation
But when the sourness of deceit is added, milk and water separate, and their savor is lost.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिलग | अलग | separate |
| होइ | हो जाते हैं | become |
| रसु | स्वाद; रूपक में प्रेम का माधुर्य | savor; figuratively, love’s sweetness |
| जाइ | चला जाता है | is lost |
| कपट | छल रूपी | of deceit |
| खटाई | खटास / खट्टा पदार्थ | sourness / a souring agent |
| परत | पड़ते ही | upon being added |
| पुनि | फिर / किंतु तब | then / but then |
| ख | दोहा ५७ का ‘ख’ संदर्भ-चिह्न | reference marker for verse 57, part kha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 57 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 1.57
- सहायक विषय
- शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
- मुद्रित पृष्ठ
- 77, 78
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।