बालकाण्ड · दोहा 57 (क) · दोहा/सोरठा
सतीं हृदय अनुमान किय सबु जानेउ सर्बग्य।
सतीं हृदय अनुमान किय सबु जानेउ सर्बग्य।
कीन्ह कपटु मैं संभु सन नारि सहज जड़ अग्य।।57क।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.57 · पुस्तक पृ. 77, 78
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सतीं हृदय अनुमान किय सबु जानेउ सर्बग्य।
सती ने हृदय में अनुमान किया: ‘सर्वज्ञ शिव सब जान गए हैं।’
English explanation
Sati inferred in her heart: ‘All-knowing Shiva has learned everything.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सतीं | सती ने | Sati |
| हृदय | हृदय में | in her heart |
| अनुमान | अनुमान | an inference |
| किय | किया | made |
| सबु | सब कुछ | everything |
| जानेउ | जान लिया है | has learned |
| सर्बग्य | सर्वज्ञ शिव ने | all-knowing Shiva |
2 कीन्ह कपटु मैं संभु सन नारि सहज जड़ अग्य।।57क।।
‘मैंने शंभु से छल किया; मैं स्त्री, स्वभाव से जड़ और अज्ञानी हूँ।’ यह सती का अपने प्रति दोषारोपण है।
English explanation
‘I deceived Shiva; I, a woman, am by nature dull and ignorant.’ These are Sati’s self-reproaching thoughts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीन्ह | किया | committed |
| कपटु | छल | deception |
| मैं | मैंने | I |
| संभु | शंभु अर्थात शिव | Shiva |
| सन | से / के प्रति | toward |
| नारि | स्त्री | a woman |
| सहज | स्वभाव से | by nature |
| जड़ | जड़बुद्धि | dull-witted |
| अग्य | अज्ञानी | ignorant |
| क | दोहा ५७ का ‘क’ संदर्भ-चिह्न | reference marker for verse 57, part ka |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 57 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 1.57
- सहायक विषय
- शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
- मुद्रित पृष्ठ
- 77, 78
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।