बालकाण्ड · दोहा 6 · दोहा/सोरठा
जड़ चेतन गुन दोषमय बिस्व कीन्ह करतार।
जड़ चेतन गुन दोषमय बिस्व कीन्ह करतार।
संत हंस गुन गहहिं पय परिहरि बारि बिकार।।6।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.6 · पुस्तक पृ. 25, 26
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1जड़ चेतन गुन दोषमय बिस्व कीन्ह करतार।
सृष्टिकर्ता ने जड़ और चेतन से युक्त विश्व को गुणों और दोषों से भरा बनाया।
English explanation
The Creator made the world of insentient and sentient beings full of virtues and faults.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जड़ | निर्जीव या अचेतन | insentient |
| चेतन | चेतना वाले | sentient |
| गुन | गुण | virtues |
| दोषमय | दोषों से भरा | full of faults |
| बिस्व | विश्व | world |
| कीन्ह | बनाया | made |
| करतार | सृष्टिकर्ता ने | the Creator |
2 संत हंस गुन गहहिं पय परिहरि बारि बिकार।।6।।
हंस के समान संत गुणरूपी दूध ग्रहण करते हैं और विकाररूपी जल छोड़ देते हैं।
English explanation
Like swans, saints take the milk of virtue and leave behind the water of faults.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संत | संत | saints |
| हंस | हंस के समान | like swans |
| गुन | गुणों को | virtues |
| गहहिं | ग्रहण करते हैं | take |
| पय | दूध | milk |
| परिहरि | छोड़कर | leaving aside |
| बारि | जल | water |
| बिकार | विकार या दोष | corruptions or faults |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 6
- स्रोत अभिलेख
- 1.6
- सहायक विषय
- संत-असंत-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 25, 26
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।