बालकाण्ड · दोहा 75 · दोहा/सोरठा
चिदानन्द सुखधाम सिव बिगत मोह मद काम।
चिदानन्द सुखधाम सिव बिगत मोह मद काम।
बिचरहिं महि धरि हृदयँ हरि सकल लोक अभिराम।।75।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.75 · पुस्तक पृ. 91, 92
भावार्थ और शब्दार्थ
1चिदानन्द सुखधाम सिव बिगत मोह मद काम।
चेतना और आनंदस्वरूप, सुख के धाम शिव मोह, मद और कामना से रहित हैं।
English explanation
Shiva, whose nature is consciousness and bliss and who is the abode of happiness, is free from delusion, pride, and desire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चिदानन्द | चेतना और आनंदस्वरूप | consciousness and bliss in essence |
| सुखधाम | सुख के धाम | abode of happiness |
| सिव | शिव | Shiva |
| बिगत | रहित | free from |
| मोह | मोह, भ्रमपूर्ण आसक्ति | delusion; delusive attachment |
| मद | अहंकार | pride |
| काम | कामना, कामवासना | desire; lust |
2 बिचरहिं महि धरि हृदयँ हरि सकल लोक अभिराम।।75।।
सभी लोकों को आनंद देने वाले हरि को हृदय में धारण करके शिव पृथ्वी पर विचरण करते हैं।
English explanation
Holding Hari, who delights all the worlds, in his heart, Shiva wanders upon the earth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिचरहिं | विचरण करते हैं | wanders |
| महि | पृथ्वी पर | upon the earth |
| धरि | धारण करके | holding |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| हरि | हरि, यहाँ राम | Hari, here Rama |
| सकल | समस्त | all |
| लोक | लोकों को | the worlds |
| अभिराम | आनंद देने वाले, मनोहर | delightful; pleasing to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 75
- स्रोत अभिलेख
- 1.75
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 91, 92
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