बालकाण्ड · दोहा 74 · दोहा/सोरठा
भयउ मनोरथ सुफल तव सुनु गिरिजाकुमारि।
भयउ मनोरथ सुफल तव सुनु गिरिजाकुमारि।
परिहरु दुसह कलेस सब अब मिलिहहिं त्रिपुरारि।।74।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.74 · पुस्तक पृ. 90, 91
भावार्थ और शब्दार्थ
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1भयउ मनोरथ सुफल तव सुनु गिरिजाकुमारि।
हे पर्वतराज की कन्या, सुनो! तुम्हारी मनोकामना सफल हो गई है।
English explanation
Listen, O maiden daughter of the mountain king! Your cherished wish has been fulfilled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयउ | हो गया | has become |
| मनोरथ | मनोकामना | cherished wish |
| सुफल | सफल | fulfilled |
| तव | तुम्हारी | your |
| सुनु | सुनो | listen |
| गिरिजाकुमारि | हे पर्वतराज की कन्या पार्वती | O maiden Parvati, daughter of the mountain king |
2 परिहरु दुसह कलेस सब अब मिलिहहिं त्रिपुरारि।।74।।
अब सभी असह्य कष्ट छोड़ दो; तुम्हें त्रिपुरारि शिव मिलेंगे।
English explanation
Now give up all these unbearable hardships; you will meet Shiva, the destroyer of Tripura.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परिहरु | छोड़ दो | give up |
| दुसह | असह्य | unbearable |
| कलेस | कष्ट | hardships |
| सब | सभी | all |
| अब | अब | now |
| मिलिहहिं | तुम्हें मिलेंगे | will meet you |
| त्रिपुरारि | त्रिपुर का नाश करने वाले शिव | Shiva, destroyer of Tripura |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 74
- स्रोत अभिलेख
- 1.74
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 90, 91
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