बालकाण्ड · दोहा 299 · दोहा/सोरठा
चढ़ि चढ़ि रथ बाहेर नगर लागी जुरन बरात।
मूल पाठ
चढ़ि चढ़ि रथ बाहेर नगर लागी जुरन बरात।
होत सगुन सुन्दर सबहि जो जेहि कारज जात।।299।।
स्रोत अभिलेख 1.299 · पुस्तक पृ. 282, 283
भावार्थ
मूल पाठ के बादरथोंपर चढ़-चढ़कर बारात नगरके बाहर जुटने लगी। जो जिस कामके लिये जाता है, सभीको सुन्दर शकुन होते हैं॥ २९९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 283 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1चढ़ि चढ़ि रथ बाहेर नगर लागी जुरन बरात।
English explanation
People mounted the chariots, and the wedding procession began assembling outside the city.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चढ़ि | चढ़कर | having mounted |
| चढ़ि | एक-एक करके चढ़कर | mounting one after another |
| रथ | रथों पर | the chariots |
| बाहेर | बाहर | outside |
| नगर | नगर के | the city |
| लागी | लगी | began |
| जुरन | इकट्ठी होने | to assemble |
| बरात | विवाह की बरात | the wedding procession |
2 होत सगुन सुन्दर सबहि जो जेहि कारज जात।।299।।
English explanation
Everyone setting out on whatever undertaking encountered favorable omens.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होत | होते थे | occurred |
| सगुन | शुभ शकुन | auspicious omens |
| सुन्दर | सुंदर; अनुकूल | good; favorable |
| सबहि | सभी को | for everyone |
| जो | जो भी व्यक्ति | whoever |
| जेहि | जिस भी | whichever |
| कारज | कार्य के लिए | undertaking; purpose |
| जात | जाता था | was setting out |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 299
- स्रोत अभिलेख
- 1.299
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 283
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 282, 283
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।