बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कलित करिबरन्हि परीं अँबारीं। कहि न जाहिं जेहि भाँति सँवारीं।।
मूल पाठ
कलित करिबरन्हि परीं अँबारीं। कहि न जाहिं जेहि भाँति सँवारीं।।
चले मत्तगज घंट बिराजी। मनहुँ सुभग सावन घन राजी।।
स्रोत अभिलेख 1.3 · पुस्तक पृ. 283, 284
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रेष्ठ हाथियोंपर सुन्दर अंबारियाँ पड़ी हैं। वे जिस प्रकार सजायी गयी थीं, सो कहा नहीं जा सकता। मतवाले हाथी घंटोंसे सुशोभित होकर (घंटे बजाते हुए) चले, मानो सावनके सुन्दर बादलोंके समूह [गरजते हुए] जा रहे हों॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 283 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कलित करिबरन्हि परीं अँबारीं। कहि न जाहिं जेहि भाँति सँवारीं।।
English explanation
Howdahs rested on splendidly adorned elephants; the manner of their decoration was beyond description.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कलित | सजे हुए | adorned |
| करिबरन्हि | श्रेष्ठ हाथियों पर | on magnificent elephants |
| परीं | रखी हुई थीं | were placed |
| अँबारीं | हौदे | howdahs |
| कहि | कहे | described |
| न | नहीं | not |
| जाहिं | जा सकते | can be |
| जेहि | जिस | in which |
| भाँति | प्रकार | manner |
| सँवारीं | सजाई गई थीं | were decorated |
2 चले मत्तगज घंट बिराजी। मनहुँ सुभग सावन घन राजी।।
English explanation
The mighty, rutting elephants, adorned with bells, moved along like a lovely array of monsoon clouds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चल पड़े | set out |
| मत्तगज | मद से भरे हाथी | rutting elephants |
| घंट | घंटियाँ | bells |
| बिराजी | सुशोभित | adorned |
| मनहुँ | मानो | as though |
| सुभग | सुंदर | lovely |
| सावन | सावन के | of the monsoon month |
| घन | बादल | clouds |
| राजी | पंक्ति | an array |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 283
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 283, 284
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