बालकाण्ड · दोहा 18 · दोहा/सोरठा
गिरा अरथ जल बीचि सम कहिअत भिन्न न भिन्न।
गिरा अरथ जल बीचि सम कहिअत भिन्न न भिन्न।
बदउँ सीता राम पद जिन्हहि परम प्रिय खिन्न।।18।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.18 · पुस्तक पृ. 40, 40
भावार्थ और शब्दार्थ
1गिरा अरथ जल बीचि सम कहिअत भिन्न न भिन्न।
वाणी और अर्थ तथा जल और लहर की तरह सीता और राम अलग कहे जाते हैं, पर वास्तव में अलग नहीं हैं।
English explanation
Like speech and meaning, or water and waves, Sita and Rama are spoken of as distinct, yet are not separate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गिरा | वाणी | speech |
| अरथ | अर्थ | meaning |
| जल | पानी | water |
| बीचि | लहर | wave |
| सम | के समान | like |
| कहिअत | कहे जाते हैं | are said to be |
| भिन्न | अलग | distinct |
| न | नहीं | not |
| भिन्न | अलग | separate |
2 बदउँ सीता राम पद जिन्हहि परम प्रिय खिन्न।।18।।
मैं सीता और राम के चरणों की वंदना करता हूँ, जिन्हें दुखी जन अत्यंत प्रिय हैं।
English explanation
I bow to the feet of Sita and Rama, to whom the distressed are exceedingly dear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बदउँ | मैं वंदना करता हूँ | I bow in reverence |
| सीता | जनकपुत्री सीता | Sita, daughter of Janaka |
| राम | रघुकुल के राम | Rama of Raghu’s lineage |
| पद | चरण | feet |
| जिन्हहि | जिन्हें, अर्थात सीता और राम को | to whom, referring to Sita and Rama |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| खिन्न | दुखी जन | the distressed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 18
- स्रोत अभिलेख
- 1.18
- सहायक विषय
- श्रीसीताराम-धाम-परिकर-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 40, 40
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।