बालकाण्ड · दोहा 157 · दोहा/सोरठा
खेद खिन्न छुद्धित तृषित राजा बाजि समेत।
खेद खिन्न छुद्धित तृषित राजा बाजि समेत।
खोजत ब्याकुल सरित सर जल बिनु भयउ अचेत।।157।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.157 · पुस्तक पृ. 162, 163
भावार्थ और शब्दार्थ
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1खेद खिन्न छुद्धित तृषित राजा बाजि समेत।
राजा अपने घोड़े सहित थकावट से व्याकुल, भूखा और प्यासा था।
English explanation
The king, along with his horse, was worn out, hungry, and thirsty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खेद | थकावट से | from fatigue |
| खिन्न | व्यथित और थका हुआ | distressed and exhausted |
| छुद्धित | भूखा | hungry |
| तृषित | प्यासा | thirsty |
| राजा | राजा | the king |
| बाजि | घोड़े | his horse |
| समेत | सहित | together with |
2 खोजत ब्याकुल सरित सर जल बिनु भयउ अचेत।।157।।
वह व्याकुल होकर नदी और तालाब खोजता रहा; जल न मिलने से अचेत हो गया।
English explanation
Distraught, he searched for rivers and ponds; without water, he became unconscious.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खोजत | खोजते हुए | searching for |
| ब्याकुल | व्याकुल | distraught |
| सरित | नदी | rivers |
| सर | तालाब | ponds |
| जल | पानी | water |
| बिनु | बिना | without |
| भयउ | हो गया | became |
| अचेत | बेहोश | unconscious |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 157
- स्रोत अभिलेख
- 1.157
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 162, 163
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