बालकाण्ड · दोहा 158 · दोहा/सोरठा
भूपति तृषित बिलोकि तेहिं सरबरु दीन्ह देखाइ।
मूल पाठ
भूपति तृषित बिलोकि तेहिं सरबरु दीन्ह देखाइ।
मज्जन पान समेत हय कीन्ह नृपति हरषाइ।।158।।
स्रोत अभिलेख 1.158 · पुस्तक पृ. 163, 163
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाको प्यासा देखकर उसने सरोवर दिखला दिया। हॢषत होकर राजाने घोड़ेसहित उसमें स्नान और जलपान किया॥ १५८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 163 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1भूपति तृषित बिलोकि तेहिं सरबरु दीन्ह देखाइ।
English explanation
Seeing that the king was thirsty, the disguised ascetic showed him a lake.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूपति | राजा प्रतापभानु को | King Pratapabhanu |
| तृषित | प्यासा | thirsty |
| बिलोकि | देखकर | seeing |
| तेहिं | उस मुनिवेशधारी ने | that disguised ascetic |
| सरबरु | सरोवर | a lake |
| दीन्ह | दिया | did |
| देखाइ | दिखा | show |
2 मज्जन पान समेत हय कीन्ह नृपति हरषाइ।।158।।
English explanation
Delighted, the king bathed and drank water, together with his horse.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मज्जन | स्नान | bathing |
| पान | जल पीना | drinking water |
| समेत | सहित | together with |
| हय | घोड़े | the horse |
| कीन्ह | किया | performed |
| नृपति | राजा प्रतापभानु ने | King Pratapabhanu |
| हरषाइ | प्रसन्न होकर | with delight |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 158
- स्रोत अभिलेख
- 1.158
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 163
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 163, 163
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