बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गै श्रम सकल सुखी नृप भयऊ। निज आश्रम तापस लै गयऊ।।
मूल पाठ
गै श्रम सकल सुखी नृप भयऊ। निज आश्रम तापस लै गयऊ।।
आसन दीन्ह अस्त रबि जानी। पुनि तापस बोलेउ मृदु बानी।।
स्रोत अभिलेख 1.159 · पुस्तक पृ. 164, 164
भावार्थ
मूल पाठ के बादसारी थकावट मिट गयी, राजा सुखी हो गया। तब तपस्वी उसे अपने आश्रममें ले गया और सूर्यास्तका समय जानकर उसने [राजाको बैठनेके लिये] आसन दिया। फिर वह तपस्वी कोमल वाणीसे बोला—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 164 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 गै श्रम सकल सुखी नृप भयऊ। निज आश्रम तापस लै गयऊ।।
English explanation
AI draft interpretation: All fatigue disappeared, and the king felt at ease. The ascetic took him to his own hermitage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गै | दूर हो गया | went away |
| श्रम | थकान | fatigue |
| सकल | सारी | all |
| सुखी | सुखी; आराम में | comfortable; at ease |
| नृप | राजा | the king |
| भयऊ | हो गया | became |
| निज | अपने | his own |
| आश्रम | आश्रम में | to the hermitage |
| तापस | तपस्वी | the ascetic |
| लै | लेकर | taking him |
| गयऊ | गया | went |
2 आसन दीन्ह अस्त रबि जानी। पुनि तापस बोलेउ मृदु बानी।।
English explanation
Knowing that the sun had set, the ascetic offered the king a seat. Then he spoke gently.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आसन | बैठने का स्थान | a seat |
| दीन्ह | दिया | gave |
| अस्त | अस्त हुआ | having set |
| रबि | सूर्य | the sun |
| जानी | जानकर | knowing |
| पुनि | फिर | then |
| तापस | तपस्वी | the ascetic |
| बोलेउ | बोला | spoke |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in speech |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.159
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 164
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 164, 164
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।