बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
को तुम्ह कस बन फिरहु अकेलें। सुंदर जुबा जीव परहेलें।।
मूल पाठ
को तुम्ह कस बन फिरहु अकेलें। सुंदर जुबा जीव परहेलें।।
चक्रबर्ति के लच्छन तोरें। देखत दया लागि अति मोरें।।
स्रोत अभिलेख 1.159 · पुस्तक पृ. 164, 164
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुम कौन हो? सुन्दर युवक होकर, जीवनकी परवा न करके, वनमें अकेले क्यों फिर रहे हो? तुम्हारे चक्रवर्ती राजाके-से लक्षण देखकर मुझे बड़ी दया आती है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 164 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 को तुम्ह कस बन फिरहु अकेलें। सुंदर जुबा जीव परहेलें।।
English explanation
Who are you? Handsome and young, why do you wander alone in the forest, disregarding your life?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| को | कौन | who |
| तुम्ह | तुम | you |
| कस | क्यों | why |
| बन | वन में | in the forest |
| फिरहु | घूमते हो | do you wander |
| अकेलें | अकेले | alone |
| सुंदर | सुंदर | handsome |
| जुबा | युवा | young |
| जीव | प्राणों को | your life |
| परहेलें | परवाह छोड़कर | disregarding |
2 चक्रबर्ति के लच्छन तोरें। देखत दया लागि अति मोरें।।
English explanation
You bear the marks of a sovereign emperor. Seeing you, I feel great compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चक्रबर्ति | चक्रवर्ती सम्राट | a sovereign emperor |
| के | के | of |
| लच्छन | लक्षण | marks; characteristics |
| तोरें | तुममें | in you |
| देखत | देखकर | on seeing you |
| दया | करुणा | compassion |
| लागि | उपजी | arose |
| अति | बहुत | greatly |
| मोरें | मेरे मन में | in me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.159
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 164
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 164, 164
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।