बालकाण्ड · दोहा 240 · दोहा/सोरठा
कहि मृदु बचन बिनीत तिन्ह बैठारे नर नारि।
कहि मृदु बचन बिनीत तिन्ह बैठारे नर नारि।
उत्तम मध्यम नीच लघु निज निज थल अनुहारि।।240।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.24 · पुस्तक पृ. 234, 235
भावार्थ और शब्दार्थ
1कहि मृदु बचन बिनीत तिन्ह बैठारे नर नारि।
उन सेवकों ने कोमल और विनम्र वचन कहकर पुरुषों और स्त्रियों को बैठाया।
English explanation
Speaking gentle and courteous words, those attendants seated the men and women.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहकर | having spoken |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बचन | वचन | words |
| बिनीत | विनम्र | courteous; humble |
| तिन्ह | उन सेवकों ने | those attendants |
| बैठारे | बैठाया | seated |
| नर | पुरुषों को | the men |
| नारि | स्त्रियों को | the women |
2 उत्तम मध्यम नीच लघु निज निज थल अनुहारि।।240।।
उच्च, मध्यम, निम्न और छोटे स्थान वाले सभी लोगों को उनकी अपनी-अपनी स्थिति के अनुरूप स्थानों पर बैठाया गया।
English explanation
People of high, middle, low, and lesser standing were seated in places suited to their respective positions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उत्तम | उच्च स्थान वाले | those of high standing |
| मध्यम | मध्यम स्थान वाले | those of middle standing |
| नीच | निम्न स्थान वाले | those of low standing |
| लघु | छोटे स्थान वाले | those of lesser standing |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने; प्रत्येक के | respective |
| थल | स्थान; स्थिति | place; position |
| अनुहारि | के अनुरूप | in accordance with |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 240
- स्रोत अभिलेख
- 1.24
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 234, 235
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।