बालकाण्ड · दोहा 239 · दोहा/सोरठा
सतानंदपद बंदि प्रभु बैठे गुर पहिं जाइ।
मूल पाठ
सतानंदपद बंदि प्रभु बैठे गुर पहिं जाइ।
चलहु तात मुनि कहेउ तब पठवा जनक बोलाइ।।239।।
स्रोत अभिलेख 1.239 · पुस्तक पृ. 233, 234
भावार्थ
मूल पाठ के बादशतानन्दजीके चरणोंकी वन्दना करके प्रभु श्रीरामचन्द्रजी गुरुजीके पास जा बैठे। तब मुनिने कहा—हे तात! चलो, जनकजीने बुला भेजा है॥ २३९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 234 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सतानंदपद बंदि प्रभु बैठे गुर पहिं जाइ।
English explanation
After bowing at Shatananda's feet, the Lord went and sat beside his teacher.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सतानंदपद | शतानंद के चरणों को | Shatananda's feet |
| बंदि | वंदना करके | having bowed to |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| बैठे | बैठ गए | sat down |
| गुर | गुरु विश्वामित्र | his teacher Vishvamitra |
| पहिं | के पास | beside |
| जाइ | जाकर | having gone |
2 चलहु तात मुनि कहेउ तब पठवा जनक बोलाइ।।239।।
English explanation
Then the sage said, ‘Come, dear sons; Janaka has sent word to invite you.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चलहु | चलो; चलिए | come; let us go |
| तात | प्रिय पुत्रों | dear sons |
| मुनि | विश्वामित्र मुनि ने | sage Vishvamitra |
| कहेउ | कहा | said |
| तब | तब | then |
| पठवा | संदेश भेजा है | has sent word |
| जनक | राजा जनक ने | King Janaka |
| बोलाइ | बुलाने के लिए | to invite you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 239
- स्रोत अभिलेख
- 1.239
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 234
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 233, 234
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।