बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सतानंदु तब जनक बोलाए। कौसिक मुनि पहिं तुरत पठाए।।
मूल पाठ
सतानंदु तब जनक बोलाए। कौसिक मुनि पहिं तुरत पठाए।।
जनक बिनय तिन्ह आइ सुनाई। हरषे बोलि लिए दोउ भाई।।
स्रोत अभिलेख 1.239 · पुस्तक पृ. 233, 234
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब जनकजीने शतानन्दजीको बुलाया और उन्हें तुरंत ही विश्वामित्र मुनिके पास भेजा। उन्होंने आकर जनकजीकी विनती सुनायी। विश्वामित्रजीने हॢषत होकर दोनों भाइयोंको बुलाया॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 234 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सतानंदु तब जनक बोलाए। कौसिक मुनि पहिं तुरत पठाए।।
English explanation
Then King Janaka summoned Shatananda and immediately sent him to the sage Vishvamitra.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सतानंदु | शतानंद को, जनक के पुरोहित | Shatananda, Janaka's priest |
| तब | तब | then |
| जनक | राजा जनक ने | King Janaka |
| बोलाए | बुलाया | summoned |
| कौसिक | कुशिकवंशी विश्वामित्र | Vishvamitra of the Kushika lineage |
| मुनि | मुनि | the sage |
| पहिं | के पास | to |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| पठाए | भेजा | sent |
2 जनक बिनय तिन्ह आइ सुनाई। हरषे बोलि लिए दोउ भाई।।
English explanation
Shatananda came and conveyed Janaka's humble request. The sage was pleased and called both brothers to him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनक | जनक का | Janaka's |
| बिनय | विनम्र निवेदन | humble request |
| तिन्ह | उन्होंने, शतानंद ने | he, Shatananda |
| आइ | आकर | having come |
| सुनाई | सुनाया | conveyed |
| हरषे | प्रसन्न हुए | was pleased |
| बोलि | बुलाकर | calling |
| लिए | अपने पास लिया | brought to him |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.239
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 234
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 233, 234
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।