बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बंधु बचन सुनि प्रभु मुसुकाने। होइ सुचि सहज पुनीत नहाने।।
मूल पाठ
बंधु बचन सुनि प्रभु मुसुकाने। होइ सुचि सहज पुनीत नहाने।।
नित्यक्रिया करि गुरु पहिं आए। चरन सरोज सुभग सिर नाए।।
स्रोत अभिलेख 1.239 · पुस्तक पृ. 233, 234
भावार्थ
मूल पाठ के बादभाईके वचन सुनकर प्रभु मुसकराये। फिर स्वभावसे ही पवित्र श्रीरामजीने शौचसे निवृत्त होकर स्नान किया और नित्यकर्म करके वे गुरुजीके पास आये। आकर उन्होंने गुरुजीके सुन्दर चरणकमलोंमें सिर नवाया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 233 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बंधु बचन सुनि प्रभु मुसुकाने। होइ सुचि सहज पुनीत नहाने।।
English explanation
Hearing his brother Lakshmana's words, Lord Rama smiled. Pure by nature, he attended to bodily cleansing and bathed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंधु | भाई लक्ष्मण के | of his brother Lakshmana |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| मुसुकाने | मुसकराए | smiled |
| होइ | होकर | having become |
| सुचि | शारीरिक शुद्धि से निवृत्त | cleansed bodily |
| सहज | स्वभाव से ही | by nature |
| पुनीत | पवित्र | pure |
| नहाने | स्नान किया | bathed |
2 नित्यक्रिया करि गुरु पहिं आए। चरन सरोज सुभग सिर नाए।।
English explanation
After completing their daily observances, they came to their teacher and bowed their heads at his beautiful lotus-like feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नित्यक्रिया | दैनिक नित्यकर्म | daily observances |
| करि | करके | having performed |
| गुरु | गुरु विश्वामित्र | their teacher Vishvamitra |
| पहिं | के पास | to; near |
| आए | आए | came |
| चरन | चरण | feet |
| सरोज | कमल-समान | lotus-like |
| सुभग | सुंदर | beautiful |
| सिर | सिर | heads |
| नाए | झुकाए | bowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.239
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 233
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 233, 234
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।