बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रबि निज उदय ब्याज रघुराया। प्रभु प्रतापु सब नृपन्ह दिखाया।।
मूल पाठ
रबि निज उदय ब्याज रघुराया। प्रभु प्रतापु सब नृपन्ह दिखाया।।
तव भुज बल महिमा उदघाटी। प्रगटी धनु बिघटन परिपाटी।।
स्रोत अभिलेख 1.239 · पुस्तक पृ. 233, 234
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे रघुनाथजी! सूर्यने अपने उदयके बहाने सब राजाओंको प्रभु (आप) का प्रताप दिखलाया है। आपकी भुजाओंके बलकी महिमाको उद्घाटित करने (खोलकर दिखाने) के लिये ही धनुष तोडऩेकी यह पद्धति प्रकट हुई है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 233 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 रबि निज उदय ब्याज रघुराया। प्रभु प्रतापु सब नृपन्ह दिखाया।।
English explanation
O Lord of the Raghu line, through the guise of its own rising, the sun showed all the kings your majesty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रबि | सूर्य | the sun |
| निज | अपने | its own |
| उदय | उदित होने | rising |
| ब्याज | के बहाने | under the guise of |
| रघुराया | हे रघुवंश के स्वामी राम | O Rama, lord of the Raghu line |
| प्रभु | आप प्रभु का | of you, the Lord |
| प्रतापु | प्रताप; प्रभावशाली तेज | majesty; commanding splendor |
| सब | सभी | all |
| नृपन्ह | राजाओं को | to the kings |
| दिखाया | दिखाया | showed |
2 तव भुज बल महिमा उदघाटी। प्रगटी धनु बिघटन परिपाटी।।
English explanation
It revealed the greatness of your arms' strength and made clear how the bow would be broken.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तव | आपकी | your |
| भुज | भुजाओं का | of the arms |
| बल | बल | strength |
| महिमा | महिमा | greatness |
| उदघाटी | उजागर की | revealed |
| प्रगटी | प्रकट हुई | became evident |
| धनु | धनुष के | of the bow |
| बिघटन | टूटने की | breaking |
| परिपाटी | रीति; ढंग | manner; process |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.239
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 233
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 233, 234
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।