बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ऐसेहिं प्रभु सब भगत तुम्हारे। होइहहिं टूटें धनुष सुखारे।।
मूल पाठ
ऐसेहिं प्रभु सब भगत तुम्हारे। होइहहिं टूटें धनुष सुखारे।।
उयउ भानु बिनु श्रम तम नासा। दुरे नखत जग तेजु प्रकासा।।
स्रोत अभिलेख 1.239 · पुस्तक पृ. 233, 234
भावार्थ
मूल पाठ के बादवैसे ही हे प्रभो! आपके सब भक्त धनुष टूटनेपर सुखी होंगे। सूर्य उदय हुआ, बिना ही परिश्रम अन्धकार नष्ट हो गया। तारे छिप गये, संसारमें तेजका प्रकाश हो गया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 233 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 ऐसेहिं प्रभु सब भगत तुम्हारे। होइहहिं टूटें धनुष सुखारे।।
English explanation
Lord, in just this way, all your devotees will be happy when the bow breaks.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ऐसेहिं | इसी प्रकार | in just this way |
| प्रभु | हे प्रभु राम | O Lord Rama |
| सब | सभी | all |
| भगत | भक्त | devotees |
| तुम्हारे | आपके | your |
| होइहहिं | होंगे | will become |
| टूटें | टूटने पर | upon breaking |
| धनुष | धनुष | the bow |
| सुखारे | सुखी | happy |
2 उयउ भानु बिनु श्रम तम नासा। दुरे नखत जग तेजु प्रकासा।।
English explanation
The sun rose; darkness vanished without effort, the stars disappeared, and radiance spread through the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उयउ | उदित हुआ | rose |
| भानु | सूर्य | the sun |
| बिनु | बिना | without |
| श्रम | प्रयास | effort |
| तम | अंधकार | darkness |
| नासा | नष्ट हुआ | vanished |
| दुरे | छिप गए | disappeared |
| नखत | तारे | the stars |
| जग | संसार में | in the world |
| तेजु | प्रकाश | radiance |
| प्रकासा | फैल गया; प्रकट हुआ | spread; shone forth |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.239
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 233
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 233, 234
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।