बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नृप सब नखत करहिं उजिआरी। टारि न सकहिं चाप तम भारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसब राजारूपी तारे उजाला (मन्द प्रकाश) करते हैं, पर वे धनुषरूपी महान् अन्धकारको हटा नहीं सकते। रात्रिका अन्त होनेसे जैसे कमल, चकवे, भौंरे और नाना प्रकारके पक्षी हॢषत हो रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 233 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नृप सब नखत करहिं उजिआरी। टारि न सकहिं चाप तम भारी।।
कमल कोक मधुकर खग नाना। हरषे सकल निसा अवसाना।।
स्रोत अभिलेख 1.239 · पुस्तक पृ. 233, 234
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नृप सब नखत करहिं उजिआरी। टारि न सकहिं चाप तम भारी।।
English explanation
All the kings shine like stars, yet cannot dispel the dense darkness represented by the bow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नृप | राजा | kings |
| सब | सभी | all |
| नखत | तारे | stars |
| करहिं | करते हैं | produce |
| उजिआरी | उजाला | light |
| टारि | दूर कर | dispel |
| न | नहीं | not |
| सकहिं | सकते हैं | can |
| चाप | धनुषरूपी | represented by the bow |
| तम | अंधकार | darkness |
| भारी | घना; प्रबल | dense; formidable |
2 कमल कोक मधुकर खग नाना। हरषे सकल निसा अवसाना।।
English explanation
At the end of night, lotuses, ruddy shelducks, bees, and birds of many kinds all rejoiced.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कमल | कमल | lotuses |
| कोक | चक्रवाक पक्षी | ruddy shelducks |
| मधुकर | भौंरे | bees |
| खग | पक्षी | birds |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
| हरषे | प्रसन्न हुए | rejoiced |
| सकल | सभी | all |
| निसा | रात्रि | night |
| अवसाना | समाप्त होने पर | at its end |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.239
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 233
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 233, 234
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।