बालकाण्ड · दोहा 238 · दोहा/सोरठा
अरुनोदयँ सकुचे कुमुद उडगन जोति मलीन।
अरुनोदयँ सकुचे कुमुद उडगन जोति मलीन।
जिमि तुम्हार आगमन सुनि भए नृपति बलहीन।।238।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.238 · पुस्तक पृ. 232, 233
भावार्थ और शब्दार्थ
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1अरुनोदयँ सकुचे कुमुद उडगन जोति मलीन।
अरुणोदय होते ही कुमुद सिमट गए और तारों की ज्योति फीकी पड़ गई—
English explanation
At dawn, the night-blooming water lilies closed and the stars’ radiance grew dim—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अरुनोदयँ | अरुणोदय होने पर | at the rising of dawn |
| सकुचे | सिमट गए | closed up |
| कुमुद | रात में खिलने वाले जल-कुमुद | night-blooming water lilies |
| उडगन | तारों के समूह की | of the multitude of stars |
| जोति | ज्योति | radiance |
| मलीन | फीकी पड़ गई | grew dim |
2 जिमि तुम्हार आगमन सुनि भए नृपति बलहीन।।238।।
जैसे आपके आगमन का समाचार सुनकर राजा बलहीन हो गए।
English explanation
Just as the kings became powerless on hearing of your arrival.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिमि | जैसे | just as |
| तुम्हार | आपका | your |
| आगमन | आना | arrival |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| भए | हो गए | became |
| नृपति | राजा | the kings |
| बलहीन | बलहीन | powerless |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 238
- स्रोत अभिलेख
- 1.238
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 232, 233
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