बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीय स्वयंबरु देखिअ जाई। ईसु काहि धौं देइ बड़ाई।।
मूल पाठ
सीय स्वयंबरु देखिअ जाई। ईसु काहि धौं देइ बड़ाई।।
लखन कहा जस भाजनु सोई। नाथ कृपा तव जापर होई।।
स्रोत अभिलेख 1.24 · पुस्तक पृ. 234, 235
भावार्थ
मूल पाठ के बादचलकर सीताजीके स्वयंवरको देखना चाहिये। देखें ईश्वर किसको बड़ाई देते हैं। लक्ष्मणजीने कहा—हे नाथ! जिसपर आपकी कृपा होगी, वही बड़ाईका पात्र होगा (धनुष तोडऩेका श्रेय उसीको प्राप्त होगा)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 234 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सीय स्वयंबरु देखिअ जाई। ईसु काहि धौं देइ बड़ाई।।
English explanation
AI draft: Let us go and see Sita’s svayamvara; whom, I wonder, will God grant the honor?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता का | Sita’s |
| स्वयंबरु | स्वयंवर | bridegroom-selection ceremony |
| देखिअ | देखें | let us see |
| जाई | जाकर | having gone |
| ईसु | ईश्वर | God |
| काहि | किसे | to whom |
| धौं | भला; जाने | I wonder; indeed |
| देइ | देते हैं | grants |
| बड़ाई | यश; गौरव | honor; glory |
2 लखन कहा जस भाजनु सोई। नाथ कृपा तव जापर होई।।
English explanation
Lakshmana said, “Lord, the one upon whom your grace rests is the one worthy of glory.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखन | लक्ष्मण, राम के भाई | Lakshmana, Rama’s brother |
| कहा | कहा | said |
| जस | यश का | of glory |
| भाजनु | पात्र | worthy recipient |
| सोई | वही | that very one |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| कृपा | कृपा | grace |
| तव | आपकी | your |
| जापर | जिस पर | upon whom |
| होई | होती है | rests; is bestowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 234
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 234, 235
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।