बालकाण्ड · दोहा 346 · दोहा/सोरठा
कनक थार भरि मंगलन्हि कमल करन्हि लिएँ मात।
कनक थार भरि मंगलन्हि कमल करन्हि लिएँ मात।
चलीं मुदित परिछनि करन पुलक पल्लवित गात।।346।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.346 · पुस्तक पृ. 328, 328
भावार्थ और शब्दार्थ
1कनक थार भरि मंगलन्हि कमल करन्हि लिएँ मात।
माताओं ने सोने के थाल मंगल-सामग्री से भरकर अपने कमल-समान हाथों में ले लिए।
English explanation
The mothers filled golden trays with auspicious materials and took them in their lotus-like hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कनक | सोने के | golden |
| थार | थाल | trays |
| भरि | भरकर | having filled |
| मंगलन्हि | मंगल-सामग्री से | with auspicious materials |
| कमल | कमल-समान | lotus-like |
| करन्हि | हाथों में | in their hands |
| लिएँ | लिए हुए | holding |
| मात | माताएँ | the mothers |
2 चलीं मुदित परिछनि करन पुलक पल्लवित गात।।346।।
माताएँ प्रसन्न होकर परिछन करने चलीं; उनके शरीर आनंद के रोमांच से खिल उठे थे।
English explanation
The mothers joyfully set out to perform the ceremonial welcome, their bodies blossoming with goosebumps of delight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चलीं | चल पड़ीं | set out |
| मुदित | प्रसन्न होकर | joyfully |
| परिछनि | स्वागत की आरती और न्योछावर की रस्म | ceremonial welcome with a lamp and offerings |
| करन | करने के लिए | to perform |
| पुलक | आनंद का रोमांच | goosebumps of delight |
| पल्लवित | खिले हुए; उभर आए | blossoming; springing forth |
| गात | शरीर | bodies |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 346
- स्रोत अभिलेख
- 1.346
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 328, 328
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।