बालकाण्ड · दोहा 254 · दोहा/सोरठा
उदित उदयगिरि मंच पर रघुबर बालपतंग।
उदित उदयगिरि मंच पर रघुबर बालपतंग।
बिकसे संत सरोज सब हरषे लोचन भृंग।।254।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.254 · पुस्तक पृ. 246, 247
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1उदित उदयगिरि मंच पर रघुबर बालपतंग।
उदय-पर्वत के समान मंच पर राम बाल सूर्य के समान उदित हुए।
English explanation
Rama rose like the morning sun upon the platform, likened to the mountain of sunrise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उदित | उदित हुए | rose |
| उदयगिरि | सूर्योदय का पर्वत | the mountain of sunrise |
| मंच | मंच | the platform |
| पर | पर | upon |
| रघुबर | रघुवंश में श्रेष्ठ राम | Rama, foremost of the Raghu lineage |
| बालपतंग | प्रातःकालीन सूर्य | the morning sun |
2 बिकसे संत सरोज सब हरषे लोचन भृंग।।254।।
संत रूपी सभी कमल खिल उठे और नेत्र रूपी भौंरे हर्षित हुए।
English explanation
All the lotus-like saints blossomed, and the bee-like eyes rejoiced.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिकसे | खिल उठे | blossomed |
| संत | संत | saints |
| सरोज | कमल | lotuses |
| सब | सभी | all |
| हरषे | हर्षित हुए | rejoiced |
| लोचन | नेत्र | eyes |
| भृंग | भौंरे | bees |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 254
- स्रोत अभिलेख
- 1.254
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 246, 247
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।