बालकाण्ड · दोहा 255 · दोहा/सोरठा
रामहि प्रेम समेत लखि सखिन्ह समीप बोलाइ।
रामहि प्रेम समेत लखि सखिन्ह समीप बोलाइ।
सीता मातु सनेह बस बचन कहइ बिलखाइ।।255।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.255 · पुस्तक पृ. 247, 248
भावार्थ और शब्दार्थ
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1रामहि प्रेम समेत लखि सखिन्ह समीप बोलाइ।
राम को प्रेमपूर्वक देखकर और सखियों को पास बुलाकर…
English explanation
Having looked at Rama with affection and called her companions close…
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामहि | राम को | Rama, as the object of seeing |
| प्रेम | प्रेम | affection |
| समेत | सहित | with |
| लखि | देखकर | having seen |
| सखिन्ह | सखियों को | her female companions |
| समीप | पास | near |
| बोलाइ | बुलाकर | having called |
2 सीता मातु सनेह बस बचन कहइ बिलखाइ।।255।।
सीता की माता स्नेह के वश होकर व्याकुल स्वर में ये बातें कहती हैं।
English explanation
Sita’s mother, overcome by affection, speaks these words in distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीता | सीता की | of Sita |
| मातु | माता | mother |
| सनेह | स्नेह के | of affection |
| बस | वश में | under the sway |
| बचन | बातें | words |
| कहइ | कहती हैं | says |
| बिलखाइ | व्याकुल होकर, विलाप करते हुए | in distress, lamenting |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 255
- स्रोत अभिलेख
- 1.255
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 247, 248
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