बालकाण्ड · दोहा 253 · दोहा/सोरठा
तोरौं छत्रक दंड जिमि तव प्रताप बल नाथ।
तोरौं छत्रक दंड जिमि तव प्रताप बल नाथ।
जौं न करौं प्रभु पद सपथ कर न धरौं धनु भाथ।।253।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.253 · पुस्तक पृ. 245, 246
भावार्थ और शब्दार्थ
1तोरौं छत्रक दंड जिमि तव प्रताप बल नाथ।
हे नाथ, आपके प्रताप के बल से मैं इसे छत्र की डंडी की तरह तोड़ दूँ।
English explanation
My lord, through the strength of your might, I could break it like the shaft of a parasol.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तोरौं | मैं तोड़ दूँ | I could break |
| छत्रक | छत्र की | of a parasol |
| दंड | डंडी | shaft |
| जिमि | की तरह | like |
| तव | आपके | your |
| प्रताप | प्रताप के | of might |
| बल | बल से | by the strength |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
2 जौं न करौं प्रभु पद सपथ कर न धरौं धनु भाथ।।253।।
यदि मैं ऐसा न कर सकूँ, तो प्रभु के चरणों की शपथ है कि फिर हाथ में धनुष और तरकश नहीं धरूँगा।
English explanation
If I fail to do this, I swear by my lord’s feet that I will never again take bow and quiver in hand.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| न | नहीं | not |
| करौं | मैं ऐसा करूँ | I accomplish this |
| प्रभु | स्वामी के | my lord’s |
| पद | चरणों की | by the feet |
| सपथ | शपथ | an oath |
| कर | हाथ में | in hand |
| न | नहीं | not |
| धरौं | मैं धारण करूँगा | I will hold |
| धनु | धनुष | bow |
| भाथ | तरकश | quiver |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 253
- स्रोत अभिलेख
- 1.253
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 245, 246
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।