बालकाण्ड · दोहा 162 · दोहा/सोरठा
आदिसृष्टि उपजी जबहिं तब उतपति भै मोरि।
आदिसृष्टि उपजी जबहिं तब उतपति भै मोरि।
नाम एकतनु हेतु तेहि देह न धरी बहोरि।।162।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.162 · पुस्तक पृ. 166, 167
भावार्थ और शब्दार्थ
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1आदिसृष्टि उपजी जबहिं तब उतपति भै मोरि।
जब सबसे पहली सृष्टि उत्पन्न हुई, तभी मेरी उत्पत्ति हुई।
English explanation
When the primordial creation arose, I came into being then.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आदिसृष्टि | सबसे पहली सृष्टि | the primordial creation |
| उपजी | उत्पन्न हुई | arose; came into being |
| जबहिं | जब ही; जिस समय | at the very time when |
| तब | तब | then |
| उतपति | उत्पत्ति; जन्म | origin; birth |
| भै | हुई | occurred |
| मोरि | मेरी | my |
2 नाम एकतनु हेतु तेहि देह न धरी बहोरि।।162।।
इसी कारण मेरा नाम एकतनु है: मैंने फिर दूसरा शरीर धारण नहीं किया।
English explanation
For that reason my name is Ekatanu: I have not taken another body since.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाम | नाम | name |
| एकतनु | एकतनु; एक ही शरीर वाला | Ekatanu; ‘having a single body’ |
| हेतु | कारण से | because of; for the reason |
| तेहि | उसी; उस | that; that very |
| देह | शरीर | a body |
| न | नहीं | not |
| धरी | धारण किया | assumed; taken on |
| बहोरि | फिर; दोबारा | again |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 162
- स्रोत अभिलेख
- 1.162
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 166, 167
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