बालकाण्ड · दोहा 161 (ख) · दोहा/सोरठा
तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर।
तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर।
सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि।।161(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.161 · पुस्तक पृ. 165, 166
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर।
तुलसी कहते हैं: सुंदर वेश देखकर मूर्ख भ्रमित होते हैं, विवेकी मनुष्य नहीं।
English explanation
Tulsidas says: fools are deceived by an attractive appearance, but discerning people are not.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुलसी | कवि तुलसीदास | the poet Tulsidas |
| देखि | देखकर | on seeing |
| सुबेषु | सुंदर वेश | attractive appearance |
| भूलहिं | भ्रमित होते हैं | are deceived |
| मूढ़ | मूर्ख लोग | fools |
| न | नहीं | not |
| चतुर | विवेकी | discerning |
| नर | मनुष्य | people |
2 सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि।।161(ख)।।
सुंदर मोर को देखो: उसकी बोली अमृत के समान है, पर उसका भोजन साँप है।
English explanation
Look at the beautiful peacock: its voice is like nectar, yet its food is snakes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| केकिहि | मोर को | the peacock |
| पेखु | देखो | look at |
| बचन | बोली | voice |
| सुधा | अमृत | nectar |
| सम | के समान | like |
| असन | भोजन | food |
| अहि | साँप | snakes |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 161 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 1.161
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 165, 166
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