बालकाण्ड · दोहा 163 · दोहा/सोरठा
सुनु महीस असि नीति जहँ तहँ नाम न कहहिं नृप।
सुनु महीस असि नीति जहँ तहँ नाम न कहहिं नृप।
मोहि तोहि पर अति प्रीति सोइ चतुरता बिचारि तव।।163।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.163 · पुस्तक पृ. 167, 168
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुनु महीस असि नीति जहँ तहँ नाम न कहहिं नृप।
सुनो राजन्, नीति ऐसी है कि राजा जहाँ-तहाँ अपना नाम नहीं बताते।
English explanation
Listen, O king: the rule of prudent conduct is that kings do not disclose their names just anywhere.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| महीस | हे राजन् | O king |
| असि | ऐसी | such |
| नीति | व्यवहार की नीति | rule of prudent conduct |
| जहँ | जहाँ | where |
| तहँ | तहाँ; वहाँ | there |
| नाम | अपना नाम | their names |
| न | नहीं | not |
| कहहिं | बताते हैं | disclose |
| नृप | राजा लोग | kings |
2 मोहि तोहि पर अति प्रीति सोइ चतुरता बिचारि तव।।163।।
तुम्हारी उसी चतुराई पर विचार करके मुझे तुमसे बहुत स्नेह हुआ है।
English explanation
Considering that very cleverness of yours, I have developed great affection for you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोहि | मुझे | to me |
| तोहि | तुम्हारे | you |
| पर | प्रति | toward |
| अति | बहुत | great |
| प्रीति | स्नेह | affection |
| सोइ | उसी | that very |
| चतुरता | चतुराई | cleverness |
| बिचारि | विचार करके | having considered |
| तव | तुम्हारी | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 163
- स्रोत अभिलेख
- 1.163
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 167, 168
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