बालकाण्ड · दोहा 136 · दोहा/सोरठा
असुर सुरा बिष संकरहि आपु रमा मनि चारु।
असुर सुरा बिष संकरहि आपु रमा मनि चारु।
स्वारथ साधक कुटिल तुम्ह सदा कपट ब्यवहारु।।136।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.136 · पुस्तक पृ. 145, 146
भावार्थ और शब्दार्थ
1असुर सुरा बिष संकरहि आपु रमा मनि चारु।
‘असुरों को मदिरा मिली, शिव को विष मिला, और तुमने अपने लिए लक्ष्मी तथा सुंदर मणि रख ली।’
English explanation
‘The demons received liquor, Shiva received poison, and you kept Lakshmi and the beautiful jewel for yourself.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| असुर | असुरों को | to the demons |
| सुरा | मदिरा | liquor |
| बिष | विष | poison |
| संकरहि | शंकर अर्थात शिव को | to Shankara, Shiva |
| आपु | अपने लिए | for yourself |
| रमा | लक्ष्मी | Lakshmi, goddess of prosperity |
| मनि | मणि; रत्न | jewel |
| चारु | सुंदर | beautiful |
2 स्वारथ साधक कुटिल तुम्ह सदा कपट ब्यवहारु।।136।।
‘तुम अपने स्वार्थ साधने वाले और कुटिल हो; तुम्हारा व्यवहार सदा छलपूर्ण है।’
English explanation
‘You pursue your own interests and are crooked; your conduct is always deceitful.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्वारथ | अपना हित; स्वार्थ | self-interest |
| साधक | साधने वाले | one who pursues |
| कुटिल | टेढ़े स्वभाव वाले; धूर्त | crooked; scheming |
| तुम्ह | तुम | you |
| सदा | हमेशा | always |
| कपट | छलपूर्ण | deceitful |
| ब्यवहारु | आचरण; व्यवहार | conduct |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 136
- स्रोत अभिलेख
- 1.136
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 145, 146
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।