बालकाण्ड · दोहा 121 · दोहा/सोरठा
असुर मारि थापहिं सुरन्ह राखहिं निज श्रुति सेतु।
असुर मारि थापहिं सुरन्ह राखहिं निज श्रुति सेतु।
जग बिस्तारहिं बिसद जस राम जन्म कर हेतु।।121।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.121 · पुस्तक पृ. 133, 133
भावार्थ और शब्दार्थ
1असुर मारि थापहिं सुरन्ह राखहिं निज श्रुति सेतु।
असुरों को मारकर प्रभु देवताओं को स्थापित करते हैं और अपनी वेद-निर्धारित मर्यादा की रक्षा करते हैं।
English explanation
Having slain the demons, the Lord restores the gods and preserves his Veda-established bounds of right conduct.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| असुर | असुरों को | the demons |
| मारि | मारकर | having slain |
| थापहिं | स्थापित करते हैं | establishes, restores |
| सुरन्ह | देवताओं को | the gods |
| राखहिं | रक्षा करते हैं | preserves |
| निज | अपनी | his own |
| श्रुति | वेदों द्वारा निर्धारित | established by the Vedas |
| सेतु | मर्यादा, धर्म की सीमा | bounds of righteous conduct |
2 जग बिस्तारहिं बिसद जस राम जन्म कर हेतु।।121।।
प्रभु जगत में अपना निर्मल यश फैलाते हैं; यही राम के जन्म का हेतु है।
English explanation
The Lord spreads his pure glory throughout the world; this is the purpose of Rama’s birth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जग | जगत में | in the world |
| बिस्तारहिं | फैलाते हैं | spreads |
| बिसद | निर्मल, निष्कलंक | pure, unblemished |
| जस | यश, कीर्ति | glory, renown |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| जन्म | जन्म | birth |
| कर | का | of |
| हेतु | कारण, उद्देश्य | reason, purpose |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 121
- स्रोत अभिलेख
- 1.121
- सहायक विषय
- अवतारके हेतु
- मुद्रित पृष्ठ
- 133, 133
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।