बालकाण्ड · दोहा 120 (घ) · दोहा/सोरठा
हरि गुन नाम अपार कथा रूप अगनित अमित।
हरि गुन नाम अपार कथा रूप अगनित अमित।
मैं निज मति अनुसार कहउँ उमा सादर सुनहु।।120(घ।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.12 · पुस्तक पृ. 131, 133
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 हरि गुन नाम अपार कथा रूप अगनित अमित।
हरि के गुण और नाम अपार हैं; उनकी कथाएँ और रूप अगणित तथा असीम हैं।
English explanation
Hari’s virtues and names are boundless; his stories and forms are countless and immeasurable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरि | भगवान हरि के | of Hari, the Lord |
| गुन | गुण | virtues |
| नाम | नाम | names |
| अपार | अपार | boundless |
| कथा | कथाएँ | stories |
| रूप | रूप | forms |
| अगनित | अगणित | countless |
| अमित | असीम | immeasurable |
2 मैं निज मति अनुसार कहउँ उमा सादर सुनहु।।120(घ।।
मैं अपनी बुद्धि के अनुसार कहता हूँ; हे उमा, आदरपूर्वक सुनो।
English explanation
I tell it according to my own understanding; Uma, listen with reverence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं | I |
| निज | अपनी | my own |
| मति | बुद्धि | understanding |
| अनुसार | के अनुसार | according to |
| कहउँ | कहता हूँ | I tell |
| उमा | हे पार्वती | O Uma, Parvati |
| सादर | आदरपूर्वक | with reverence |
| सुनहु | सुनो | listen |
| घ | पद-संदर्भ का अक्षर ‘घ’ | verse-reference marker ‘घ’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 120 (घ)
- स्रोत अभिलेख
- 1.12
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद · अवतारके हेतु
- मुद्रित पृष्ठ
- 131, 133
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