बालकाण्ड · दोहा 267 · दोहा/सोरठा
अरुन नयन भृकुटी कुटिल चितवत नृपन्ह सकोप।
अरुन नयन भृकुटी कुटिल चितवत नृपन्ह सकोप।
मनहुँ मत्त गजगन निरखि सिंघकिसोरहि चोप।।267।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.267 · पुस्तक पृ. 257, 258
भावार्थ और शब्दार्थ
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1अरुन नयन भृकुटी कुटिल चितवत नृपन्ह सकोप।
लाल आँखों और टेढ़ी भौंहों से लक्ष्मण राजाओं को क्रोधपूर्वक देख रहे हैं।
English explanation
With reddened eyes and knitted brows, Lakshmana gazes angrily at the kings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अरुन | लाल | reddened |
| नयन | आँखें | eyes |
| भृकुटी | भौंहें | brows |
| कुटिल | टेढ़ी; तनी हुई | knitted; drawn together |
| चितवत | देखते हुए; देख रहे हैं | gazing; looks |
| नृपन्ह | राजाओं को | at the kings |
| सकोप | क्रोध सहित | angrily |
2 मनहुँ मत्त गजगन निरखि सिंघकिसोरहि चोप।।267।।
मानो मदमस्त हाथियों के झुंड को देखकर सिंह के बच्चे में चुनौती देने का जोश उमड़ आया हो।
English explanation
As though a young lion, seeing a herd of elephants in must, were stirred with eagerness to challenge them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनहुँ | मानो | as though |
| मत्त | मदमस्त | in must; maddened |
| गजगन | हाथियों का झुंड | a herd of elephants |
| निरखि | देखकर | having seen |
| सिंघकिसोरहि | सिंह के बच्चे को | in a young lion |
| चोप | उत्साह; चुनौती देने का जोश | ardor; eagerness to challenge |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 267
- स्रोत अभिलेख
- 1.267
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 257, 258
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